तंत्र एक प्राचीन विधि है शरीर को रक्षा करने की। तंत्र दो सब्दो की सं मिश्रण से बना है। तन अर्थात शरीर , त्र अर्थात त्रान यानी रक्षा । तंत्र भौतिक जगत के बस्तुउ से समंध रखता है। इसकी आधार पर भौतिक और पदार्थ बिशेष दिखाई पड़ता है। प्राचीन काल में बेद से उपनिषध की और इसकी बाद पुराण की उद्वभ हुई थी। ठीक इसकी बाद ही तंत्र ज्ञान की भी उद्वभ हुवा था। तंत्र साधना योग साधना से लेकर मोक्ष प्राप्ति तक फैला हुआ है। तंत्र शास्त्र की रचेईता महादेव को माना गया है। सभी तंत्र साधक किसी ना किसी रूप में भगवान शिव को ही तंत्र साधना के आराध्य मानते है।
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