Sunday, 26 July 2020

इच्छा

इच्छा मनुष्य के मन में जन्म लेता है और बिचार से आता है। और परिस्थिति के अनुयायि मन में इच्छा जन्म लेता है। जिस प्रकार से उसके जीवन में परिस्थिति होता है उसी तरह से इच्छाएं मन में आता है। इच्छा हमे जीबन में कुछ करने के लिए पेरित करता है और इसके के कारण ही मनुष्य कर्म करते रहते है।


जीबन में सब कुछ अस्पस्ट धुंदली सा होती है परंतु एक चीज स्पस्ट एबं साफ होता है। वह है स्वइच्छा। किसी भी परिस्थिति में मनुष्य किसी भी काम को करना या ना करना; या चुनना ये उसका स्वइच्छा होता है। और इसी के आधार पर उसका जीबन का अच्छा या बुरा को गति करता है। इसीलिए मनुष्य को इच्छा में समलित प्रतिफल पर दृस्टिकुण करके आगे बढ़ना चाहिए। 


मनुष्य हमेशा पाने कि इच्छा करता है परंतु उसे खूने का नही। इच्छा हि मनुष्य को अपने लख्य तक पहचवाता है। इच्छा मन कि सबसे बड़ी शाक्ति होती है। जिसके पास इच्छा शाक्ति प्रबल हो वह जीबन में कुछ भी करने की सामर्थ होता है। मनुष्य के मन में हजारों इच्छाएं होता है; किसी को अच्छा खाने की इच्छा तो किसी को अमीर आदमी बनने की इच्छा और किसीको अच्छा पहनने की इच्छा।मनुष्य के मन में इच्छा का कोई अंत नहीं होता । कहा जाय तो इच्छा मनुष्य को गुलाम बना लेता है। और इसकी संतुलन हेतु प्रतेक मनुष्य को आत्मज्ञान हुना आवश्यक है।


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